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Sampling every day life

लब्ज़-ए-उल्फ़त

  • काँच का बुरादा बनाकर हमने आँखों पे अपनी सजा दिया,
  • उनको लगा के हम रोशन हो उठे,
  • रोशन तो थीं आंखें,
  • ना झपकी इस डर से,
  • कि आंखें बंद कर लीं तो आप दिखना ना बंद हो जाओ।


  • होती जो आंखें पाक तुम्हारी,
  • तो समझ जाते कि लूटना सिर्फ तुम्हारा दिल था,
  • अफसानो का ज़ोर ऐसा चला तुम्हारे दिल पर,
  • कि हमारी गरीबीअत की नुमाइश भी बिक ना सकी।


  • कंधे ना होते उधार के बाज़ार में,
  • तो मरना भी जुर्म हो जाता,
  • कर्ज़दार हूँ उनका जो संभाल लिये मुझको,
  • वरना मर्ज़ में मुस्कुराना भी जुर्म हो जाता।


  • जो वाकिफ़ कर दूँ खुरपेच सिलसिलों से तुझको,
  • तो तुम कर्ज़दार ना हो जाओ मेरे,
  • ज़िंदगी बोलते हो तुम जिसको ए साहिब,
  • हमनें टूटे हुए दीयों की तरह बन्नी पे सजा रखी है।


  • खत्त खोला खत्त में उनका पैग़ाम आया,
  • थोड़ी कम परवाह क्यों नहीं करते हमारी,
  • ये सुनके हमनें परवाह की बयालीस लीटर वाली बाल्टी उनपे गिरा दी।


  • सो जाओ आंखों के मोहल्ले में मचलते ए ख्वाबो,
  • बुझ गए तो हमको ही कोसोगे,
  • उनको क्या पड़ी है तुम्हारी,
  • जो तुम्हारी गलियों में भी अनजान हुए फिरते हैं।


  • पन्नो की सूखी स्याही निशाँ है कि अरसों से तुम्हे याद कर रहे हैं,
  • वरना आखों की नमी अभी भी सोच रही है कि कल की ही तो बात है।


  • दुनिया पूछती है हमसे कि बेटा क्या काम करते हो?
  • जी हम जल चुके घरों की इन्शुरन्स करते हैं।


  • ख्वाइशें ही ऐसी थीं कि आपसे ब्यान ना कर सके,
  • आप ये सोचते रहे कि साला गूंगा तो नहीं।



  • तेरी एक फोटो जीन्स की छोटी वाली जेब में रखी हुई है,
  • सच पूछो तो ऐसे फिट हुई हो के अब नहीं निकलोगी।


  • चार इंच का फरक है,
  • उनमें और हम में,
  • हम चार इंच बड़े दिल वाले,
  • वो चार इंच हाइट में ही छोटे हैं।


  • ओढ़ लेता हूँ मुस्कराहट कभी हिम्मत करके,
  • वरना हमारी चोटों के दीवाने तो बोहोत हैं,
  • आईये कभी थोड़ा दिलदार होके बाज़ार में,
  • इनको अपना सही खरीदार तो मिले।