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Sampling everyday life

गुलों के रंग

  • ऐ बहारों हो सके तोह आ जाना उनके हिस्से किसी बहाने से तुम,
  • जिन्होंने हमें भूलकर तेरी चाहत को सजा रखा है।

  • उनकी फितरत जो जाननी चाही हमनें तोह पाया कि उनका तोह हर रंग ही निराला है।

  • फीके से हैं रंग तेरी जुदाई में,
  • दिल तोह उदास था ही तेरी बेरुखी देख के।

  • दिल-ए-नादान घायल नहीं था तेरे हुस्न-ए-रुखसार पे,
  • सबब था खुद को खुद से रिहा करने का।

  • पाक निगाहों ने बक्श दी रहमत ऐसी,
  • अब आईना भी हममें अक्स ढूंढ़ता है।

  • रूठ के दुनिया से थामा था दामन तेरा,
  • आशियाना हासिल हुआ फिर भी अफ़सुर्दगी का।